➤ हाईकोर्ट ने 1 जुलाई 2022 से लंबित डीए की किस्तों और एरियर पर छह सप्ताह में फैसला करने के दिए निर्देश
➤ कर्मचारियों के 18 मई 2026 के लंबित अभ्यावेदनों पर कानून और सरकारी ज्ञापनों के तहत निर्णय होगा
➤ भरमौर में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल के निर्माण पर दाखिल जनहित याचिका भी निपटाई गई
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों की ओर से एक जुलाई 2022 से लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की किस्तों और बकाये के भुगतान को लेकर दायर आठ याचिकाओं का एक साथ निपटारा कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों की ओर से दिए गए अभ्यावेदनों पर छह सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार फैसला लिया जाए। यदि कर्मचारी अपने दावों के अनुसार पात्र पाए जाते हैं तो उनके लंबित डीए की किस्तों और एरियर का भुगतान भी निर्धारित अवधि के भीतर करने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सक्षम अधिकारी कर्मचारियों के अभ्यावेदनों पर कानून और संबंधित सरकारी ज्ञापनों के तहत निर्णय लें। विभाग की ओर से लिए गए निर्णय की जानकारी भी याचिकाकर्ताओं को दी जाए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता अपने दावे के अनुसार डीए और एरियर पाने के पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें लंबित किस्तों और बकाये का भुगतान छह सप्ताह के भीतर किया जाए।
पांच लंबित किस्तों और एक जुलाई 2022 से डीए बकाये का मामला
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर से जारी 2 मार्च 2024, 16 अक्तूबर 2024 और 15 अक्तूबर 2025 के विभिन्न कार्यालय ज्ञापनों के तहत कर्मचारी एक जुलाई 2022 से महंगाई भत्ते के बकाये के हकदार हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक यह राशि जारी नहीं की गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि राज्य सरकार की ओर से जारी 10 अक्तूबर 2024 और 3 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं के माध्यम से राज्य सरकार के कर्मचारियों की एक विशेष श्रेणी को देय तिथियों से केंद्र सरकार की दरों पर महंगाई भत्ता दिया गया है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं के साथ भेदभाव होने का दावा अदालत के समक्ष रखा गया।
18 मई 2026 को दिए गए थे अभ्यावेदन, अभी तक लंबित
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि कर्मचारियों ने डीए की लंबित किस्तों और बकाये के भुगतान के संबंध में 18 मई 2026 को सक्षम अधिकारियों के समक्ष अपने अभ्यावेदन सौंपे थे। हालांकि, इन अभ्यावेदनों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया था।
अदालत ने इस स्तर पर कर्मचारियों के दावों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की। इसके बजाय राज्य सरकार और संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कर्मचारियों की ओर से लंबित पांच किस्तों और एक जुलाई 2022 से देय डीए बकाये की मांग से जुड़ी अर्जियों पर छह सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार फैसला करें।
अदालत ने यह आदेश संदीप कुमार और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर दिया। अब संबंधित अधिकारियों को निर्धारित अवधि में कर्मचारियों के अभ्यावेदनों पर निर्णय लेना होगा और पात्र पाए जाने पर डीए की किस्तों तथा एरियर का भुगतान भी करना होगा।
भरमौर में एकलव्य मॉडल स्कूल के निर्माण का रास्ता साफ
इसी दौरान हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चंबा जिले के भरमौर (होली) में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल के निर्माण और उससे जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण से संबंधित जनहित याचिका का भी निपटारा कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को देखने के बाद इस मामले की सुनवाई बंद करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि अब इस मामले की अलग से निगरानी करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि स्कूल और हॉस्टल के निर्माण का काम सही तरीके से आगे बढ़ रहा है।
सरकार की स्टेटस रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट
सरकार की ओर से अदालत में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में स्कूल निर्माण की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी गई। रिपोर्ट देखने के बाद खंडपीठ ने संतोष व्यक्त किया और जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
अदालत को यह भी सूचित किया गया कि नए मानकों के तहत स्कूल निर्माण के लिए आवश्यक न्यूनतम भूमि का क्षेत्रफल घटाकर 8 एकड़ कर दिया गया है। इसके बाद भरमौर (होली) में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल और उससे जुड़ी सुविधाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।



